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खोया हुआ ऊँट David Heathfield    
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खोया हुआ ऊँट

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खोया हुआ ऊँट

 

 

 

 

 

 

 

एक बार एक व्यापारी था. वह ज्यादा अमीर नहीं था. उसके पास एक उंट था जो ज्यादा खूबसूरत नहीं था, पर वह उस उंट से प्यार करता था. एक दिन, वह उंट को देखने गया मगर उंट वहां नहीं था. उंट गायब हुआ था. ‘अरे, मेरा उंट कहाँ गया? मेरा उंट, कहाँ है वह? उसने हर जगह देखा; सब जगह ढूंडा, मगर उसे अपना उंट नहीं मिला.

आखिर, उसने तीन अजनबियों को अपनी ओर आते हुए देखा. पेड़ों से घिरे हुए एक रास्ते से वह चल के उसकी तरफ आ रहे थे. जब वे उसके पास पहुचे, उसने पहले आदमी को रोक कर पूछा: ‘क्या आपने मेरे उंट को देखा है?’

‘तुम्हारा उंट एक आँख से अँधा है.’

‘हाँ, यह सच है; मेरा उंट एक आँख से अँधा है. कहाँ है वह?’

पर वह आदमी चलता गया.

अब दूसरा मुसाफिर आ पंहुचा.

‘क्या आपने मेरा उंट देखा है?’

‘तुम्हारा उंट एक पैर से लंगड़ा है.’

‘जी हाँ. कहाँ है वह, आपने उसके साथ क्या किया?’

पर वह मुसाफिर चलता गया.

अब तीसरा अजनबी आ कर रुक गया.

‘क्या आपने मेरा उंट देखा है?’

‘तुम्हारे उंट की पूँछ छोटी है.’

‘यह सच है! क्या किया आपने उसके साथ?’

मगर वह मुसाफिर चलता गया.

उस व्यापारी ने उन तीनो मुसाफिरों का, पेड़ों से घिरे उस रास्ते पर पीछा किया. ‘कहाँ है मेरा उंट? आपने मेरा उंट चोरी किया है! चोरी किया है आपने उसे! चोर! आवारा!

वे उस रास्ते से चलते गए. अब वह रास्ता चौड़ा हो गया. और वह चलता गया, पहले से भी ज्यादा गुस्से में क्योंकि वह उसे ध्यान नहीं दे रहे थे.

वह उन पर और जोर से चिल्लाता गया. अब उन सब ने सुलतान के महल की बाग़ में प्रवेश किया. उस सुगन्धित बाग़ में जासमीन और दुसरे सुन्दर फूल थे. और वहां सुलतान पधारें: ‘इस शोर का क्या मतलब है?’

‘इन अजनबियों ने मेरा उंट चोरी किया है!’

‘तुम्हे यह कैसे पता?’

‘वे जानते है की मेरा उंट एक आँख से अँधा है! वे जानते है की मेरा उंट एक पैर से लंगड़ा है! वे जानते है की मेरे उंट की पूँछ छोटी है!’

‘और आप को यह कैसे पता?’, सुलतान ने पुचा.

पहला अजनबी बोला: ‘मैं जानता हूँ की इसका उंट एक आँख से अँधा है, क्योंकि जब हम पेड़ों से घिरे उस रास्ते से आ रहे थे, सिर्फ बाए तरफ के डाल के पत्ते टूटे हुए थे. दाए तरफ के पेड़ों के पत्तों को छुआ भी नहीं गया था.’

‘आप को कैसे पता की इसका उंट एक पैर में लंगड़ा है?’

‘उंट के रास्ते को देखते हुए,’ दूसरा अजनबी बोला, ‘उसके पैरों के निशानों से यह बात साफ़ थी.’

‘आप को कैसे पता की उंट की पूँछ छोटी है?’

‘यह बात साफ़ है की उंट की पूँछ छोटी है,’ तीसरा अजनबी बोला. ‘रास्ते में खून के निशान थे. अगर उंट की पूँछ लम्बी होती तो उसने खून चूसने वाले कीड़े मकोंडों को दूर किया होता.’

‘यह सही है,’ सुलतान ने कहा. ‘ तुम्हारा उंट मेरे बाग़ में कुछ ही देर पहले आया था’.

और फिर उस उंट को सामने लाया गया. ज्यादा सुंदर नहीं था वह उंट. पर उस व्यापारी ने अपने उंट को चूमा. ‘अरे, मेरा उंट. मेरा सुंदर उंट मुझे वापस मिल गया.’

और वह सुलतान उन तीनों मुसाफिरों की तरफ मुडा: ‘आप सच मुच होशियार हैं. यही रहिये,’ सुलतान ने कहा, ‘मेरे सलाहकार बनकर.’

और पहले कभी भी, और आगे कभी भी, किसी सुलतान को इतना ज्ञान और इतनी सलाह नहीं मिली जितनी की उन तीनो से मिली.

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