तीन बकरे जिनका नाम ग्रफ्फ था
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एक बार की बात है तीन बकरे थे जिनका नाम ग्रफ्फ था, छोटा बकरा, मध्यम आकार वाला बकरा और बड़ा बकरा। वह हरी भरी घाटी में एक खेत में रहते थे। उन्हें मीठा घास खाना पसंद था, लेकिन दुख की बात थी की उनका खेत अब बंजर और सूखा हो गया है क्यूंकि वो लालची बकरे थे और उन्होंने सारा घास खा लिया था। पर वह अभी भी भूखे थे। कुछ दूर उन्होंने एक खेत देखा जो आँखों को अच्छा लगने वाले हरे भरे मीठे घास से भरा हुआ था। लेकिन बदकिस्मती के साथ उस तक पहुंचने का एक ही रास्ता था - नदी के ऊपर झूलते पुल को पार कर ही वहां तक पहुंचा जा सकता था। उस पुल के नीचे ट्रेवर नाम का एक बहुत बड़ा और भयानक दानव रहता था जिसे हर समय भूख लगती रहती थी। उस के लिए एक मज़ेदार और रसीले बकरे को खाने से बहेतर और कोई चीज़ नहीं थी। छोटा बकरा पुल के ऊपर सब से पहले पहुंचा। बड़े ही ध्यान के साथ उसने एक खुर पहले रखा और फिर दूसरा। पुल बहुत ज्यादा झूल रहा था इस लिए उसने कोशिश की बावजूत उसके खुरों के कारण लकड़ के तख्तों के बने पुल पर लड़खड़ाने की आवाज़ आ रही थी - टिप-टॉप, टिप-टॉप।

अचानक ही वहाँ बहुत ज़ोर से आवाज़ आई, 'यह कौन है जो मेरे पुल पर लड़खड़ा कर चल रहा है' और पुल के नीचे से एक भयानक दिखने वाला दानव बहार आया।
लड़खड़ाते हुए खुरों के साथ, छोटा बकरा जिस का नाम ग्रफ्फ था, डरी हुई बारीक़ आवाज़ में बोला, 'यह मैं हूँ। मैं तो बस थोड़ा सा घास खाने के लिए जा रहा हूँ।‘
'नहीं, तू नहीं जा सकता। मैं तुझे नाश्ते, दोपहर के भोजन और चाय के साथ खाऊंगा।'
छोटा बकरा जिस का नाम ग्रफ्फ था, उसने डरते हुए बोला, 'नहीं, ऐसे नहीं। मैं तो बस एक छोटा सा बकरा हूँ। आप मेरे भाई के लिए इंतज़ार क्यों नहीं करते? वह मुझसे बड़े और ज्यादा स्वाद हैं।'
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यह सुन के लालची दानव ने इंतज़ार करने का फैसला किया। छोटा बकरा पुल से बच निकला और पुल की दूसरी तरफ जा कर ताज़ा और हरा घास खाने लगा। जब दूसरे बकरीओं ने देखा छोटा बकरा ताज़ा और हरा घास खा रहा है उन्हें बड़ी ही इर्षा हुई क्यूंकि वह भी घास खाना चाहते थे। इसलिए मध्यम आकार वाला बकरा, जिस का नाम ग्रफ्फ था, पुल पर गया और नदी पार करने लगा। उसके खुरों से लड़खड़ाने की आवाज़ सुनाई देने लगी - टिप-टॉप, टिप-टॉप और दुबारा फिर दानव पुल की नीचे से बाहर आ गया।
उसने गरजती आवाज़ में पूछा, 'मेरे पुल की ऊपर कौन लड़खड़ा के चल रहा है?'
कमकपाते हुए खुरों की साथ मध्यम आकार वाला बकरा, जिस का नाम ग्रफ्फ था, ने बड़ी ही नरम आवाज़ में बोला, 'यह मैं ही हूँ। मैं अपने छोटे भाई, जिस का नाम ग्रफ्फ है, उसका पीछा कर रहा हूँ जिससे हम भी घास खा सकें।'

'नहीं, तू ऐसे नहीं कर सकता। मैं तुझे नाश्ते, दोपहर के भोजन और चाय के साथ खाऊंगा।'
'नहीं, दानव जी, आप मुझे नहीं खाना चाहोगे। मैं इतना बड़ा नहीं हूँ कि मुझे खा कर आप का पेट भर जाये। इंतज़ार करिये जब तक मेरा बड़ा भाई न आ जाये, वह मुझ से भी ज्यादा स्वाद है।'
'ठीक है,' दानव ने बोला और मध्यम आकार बाला बकरा फटाफट पल के ऊपर से भाग गया और छोटे बकरे के साथ मीठा और हरा घास खाने लगा।

बड़े बकरे ग्रफ्फ को इर्षा होने लगी और पुल पार कर अपने भाईओं के साथ मिलके घास खाने का इंतज़ार ना कर सका। इसलिए हिम्मत करके उसने अपने खुर पुल पर रखे और आवाज़ आई - ट्रिप, ट्रैप, ट्रिप, ट्रैप। अचानक ही दानव पुल के नीचे से बाहर आ गया।
'मेरे पुल पर कौन लड़खड़ा के चल रहा है?' दानव ने गहरी और ऊँची आवाज़ में पूछा।
'यह मैं हूँ,' बड़े बकरे ग्रफ्फ ने कहा और उसने पूछा, 'तुम कौन हो?'
'मैं दानव हूँ, और तुझे नाश्ते, दोपहर के भोजन और चाय के साथ खाऊंगा।'
'नहीं, तुम ऐसा नहीं कर सकते।'
'नहीं, मैं करूँगा। तुम देखना।'
फिर दानव बड़े बकरे की तरफ ज़ोर से भागा, जिसने अपना सिर झुकाया हुआ था और उसने बहादुरी से दानव पर हमला कर दिया। बड़े बकरे ने दानव को अपने सींग से पकड़ लिया और नीचे नदी में गेर दिया। दानव चलते पानी में गायब हो गया और दोबारा कभी नज़र नहीं आया। उस दिन के बाद कोई भी पुल पार कर सकता है और तीन बकरे जिन का नाम ग्रफ्फ है उनके साथ बढ़िया, मीठा और हरा घास खा सकता है।
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