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हाथी उड़ते क्यों नहीं ?    
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हाथी उड़ते क्यों नहीं ?

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हाथी उड़ते क्यों नहीं ? 

 

 

 

यह बात बहुत दिनों पहले की बात है। एक ज़माने में हाथी उडा करते थे। उनके चार बड़े बड़े पंख थे और वे इतनी तेज़ी से फिरा करते थे की और सब प्राणी आवाक हो जाते थे!

पर ये बड़े जानवर थोड़े से बुद्धू भी थे। पर शुश - अन्य जानवर इसके बारे में चुप रहा करते थे। किसी से बोलते नहीं।

क्योंकि हाथियों में बहुत ताकद थी और वे बहुत तेज़ी से घूम सकते थे, भगवान ने सोचा की वे हाथियों की मदद लेंगे। वे हाथियों पे सवार सारी दुनिया घूम सकते थे। एक क्षण में वे चीन पहोंच जा सकते थे और दुसरे पल में आइसलैंड! और ये हाथी इतने मज़बूत थे की वे पर्वतों को धक्का मार मार, ठीक जगह पर पहोंचा देते: जैसे की हिंदुस्तान में हिमालय और तंज़ानिया में किलिमंजरो। हाथी पर सवार हो कर भगवान ने सारी दुनिया को ठीक कर दिया। दुनिया तो मतलब 'परफेक्ट' हो गयी!

जब यह बड़ा काम ख़त्म हो गया, भगवान ने हाथियों को छुट्टी दे दी। अब हाथियों को कोई काम ही नहीं था। फिर क्या हुआ मालूम है? हाथी बेकार हो गए! पुराने दिनों को याद करते थे सब हाथी एक साथ बैठ कर। एक दुसरे को उन दिनों की कहानिया सुनाते। और हर समय यही सोचते थे की भगवान ने उन्हें बहुत सम्मान दिया। हाथी सोचने लगे की वे और सब प्राणियों से ज्यादा अच्छे थे। सब से 'इम्पोर्टेन्ट'!

एक हाथी ने दुसरे से कहा, "हा हा! उस मोर को देखो। कितना छोटा है! और उसके पंख कितने बुरे है। देखने में बिलकुल फ़ालतू! हमारी तरह सुंदर और मज़बूत तो नहीं!"

और हाथी यह बात जोर जोर से करते थे ताकि छोटा सा मोर भी सुन पाता था। मोर ने सोचा, "हाथी ठीक ही कह रहे है। मैं छोटा हूँ। मेरे पंख परियों की तरह सुंदर तोह नहीं। और मुझ में तो ताकद भी नहीं है!"

दिनबदिन हाथी अपने आपको खूब समझने लगे। सारी दुनिया के केले निछोड़कर वे उड़ जाते थे। और सब प्राणियों को एक भी केला नहीं मिलता। सब प्राणी बहुत दुखी थे। और यह केले लेकर हाथी क्या करते मालूम? वे गाव में जाते और अपने बड़े बड़े पाओं और बड़े बड़े पंखो को खोलकर सारे गाव को कुचल देते! वहां बैठकर केलों के साथ पिकनिक मनाते!

पर गाव के लोग बहुत दुखी हो गए। उनके घरों को हाथियों ने कुचल दिया था। भगवान ने जब यह सब देखा, उन्होंने सोचा की हाथियों को एक सबक सिखाना चाहिए!

भगवान ने सारे हाथियों को बुलाया और हाथियों से कहा, "ए हाथियों! मेरी बात सुनो। मैं तुम्हारा आभारी हूँ। आप लोगों ने मुझे बहुत मदद की है। इसलिए मैं एक बड़ी पार्टी मनाऊंगा। आपके लिए! सिर्फ हाथियों के लिए!"

सारे हाथी बहुत खुश थे। एक हाथी ने दुसरे हाथी से कहा, "देखो, भगवान भी जानते है की हम ने उनका कितना उपकार किया। यह बहुत अच्छा है की भगवान हमको सम्मानित कर रहे है।"

और पार्टी के दिन सारे हाथी जमा हो गए। भगवान ने हाथियों के सामने तरह तरह का खाना रख दिया। पीले पीले केले, लाल लाल अनार, खचर पचार अमरुद, जुसिले आम! जो फल सोचो वह वहाँ था! और हाथी यह सब देख कर खूब खुश हो गए। हाथियों ने खाना शुरू किया। आह, क्या सुंदर था खाना! अब सब हाथियों को नींद आने लगी। उनके पेट भर गए और वही के वही सो गए।

भगवान इसी समय का इंतज़ार कर रहे थे। चुप चाप से भगवान ने एक बड़ासा चाक़ू लिया। सारे हाथियों के पंख काट दिए उन्होंने! और इन सुंदर पंखो को भगवान ने मोर को दे दिया। मोर खुश हो गए! वे जंगल में जाके नाचने लगे!

जंगल में मोर नाचा, किसने देखा, किसने देखा रे ?

जंगल में मोर नाचा, मैंने देखा, मैंने देखा रे!

और आप हाथियों के बारे में सोचिए। जब वे उठे और उन्होंने देखा के उनके सुंदर सुंदर पंख भगवान ने मोर को दे दिए, वे बहुत नाराज़ थे। पर भगवान ने कहा की, "अब मुझे समय नहीं! अब तुम्हारा काम तुम्हारी तकाद से है। मैं चाहता हूँ की तुम अच्छे बन जाओ और गाव के लोगो की मदद करो!"

हाथी बहुत शर्मिंदा हो गए। चुप चाप उन्होंने गाव के लोगों की मदद करना शुरू कर दिया। और आज तक हर एक गाव में एक न एक हाथी आता जाता है और लोगों की मदद करता है! 

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